जब पौधों को जमीन से पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन नहीं मिलता तो वे नॉनवेज खाना शुरू कर देते हैं। सुनकर अजीब सा लग रहा है ना ? पर ये सच है।
दुनिया भर में इस तरह की करीब 600 पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। ये पौधे कार्निवोरस यानी कीटभक्षी कहलाते हैं। कीटों को खाकर ये पोषक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं।
चलो, आज खाते-पीते पौधे की अनोखी दुनिया के बारे में जानते हैं...
1. वीनस फ्लाईट्रैप
यह पौधा अमेरिका में पाया जाता है। यह कीटों को खा जाता है। इस पौधे को देखोगे तो लगेगा जैसे दो फ्लैप लगे हैं। ये फ्लैप खुले होते हैं। इन फ्लैप्स पर बाल होते हैं। जैसे ही कीट इस पौधे के पास आता है तो बाल उसे खींचकर फ्लैप के अंदर डाल देते हैं और फिर फ्लैप बंद हो जाते हैं। जब कीड़ा पूरा खा लिया जाता है, तब पौधे के फ्लैप फिर से खुल जाते हैं। इस पौधे के सेंसर इतने तेज होते हैं कि अगर किसी पेंसिल की नोक या अन्य चीज से तुम फ्लैप को छुओगे तो भी फ्लैप बंद नहीं होंगे, पर हां, एक कीट के स्पर्श करते ही ये बंद हो जाते हैं।
2. ड्रोसेरा
इस पौधे में चारों ओर पत्तियां होती हैं। हर पत्ती पर बाल होते हैं। इस पौधे से एक चमकीला पदार्थ निकलता रहता है। कीड़ा इसे देखकर सम्मोहित होता है और पौधे के पास आता है। इसके बाद पौधे के ये बालनुमा रेशे कीडे को पकड़कर नीचे की ओर ले जाते हैं और वहां पौधे द्वारा कीट को खा लिया जाता है। यह पौधा मुख्य रूप से पानी वाले क्षेत्र के आसपास पाया जाता है।
3. ब्लैडरवर्ट
इसके पते काफी बारीक होते हैं। ज्यादातर यह पौधा पानी में तैरता है। इसकी कुछ पत्तिया फूलकर एक थैली के आकार की हो जाती हैं। इस थैली के मुंह पर तीन बाल होते हैं, जो पानी में तैरते कीड़े को पकड़कर थैली के अंदर डाल देते हैं। जैसे ही कीड़ा अंदर गिरता है तो थैली का मुंह अपने आप बंद हो जाता है और कीड़ा वहां मर जाता है। इसके बाद पौधा इस कीड़े को खा जाता है। जब कीड़ा खत्म हो जाता है तो थैली का मुंह फिर से खुल जाता है अगले कीड़े की तलाश में।
4. नेपेनथीस
नेपेनथीस को एशियन पिचर प्लांट्स भी कहा जाता है। ये समुद्र के अंदर पाए जाते हैं और ठंडे पहाड़ी प्रदेशों में भी मिलते हैं। इसकी पतियों में एक विशेष तरह का तरल पदार्थ होता है, जिससे इसमें गिरने वाला कीट चिपक जाता है और फिर यह उस कीट को खा जाता है। इस पौधे के पत्तों का ऊपरी हिस्सा सुराही के आकार का होता है, और मुंह पर एक ढक्कन रहता है। सुराही की परिधि से एक तरल पदार्थ निकलता है, जो कीट को आकर्षित करता है। जैसे ही कीट इस पर बैठता है तो वो अंदर फिसल जाता है और वहां मर जाता है। सुराही के अंदर के बैक्टीरिया उसे सडमते हैं और तब वह पौधे के द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।



